राजनीति में नई मिसाल: पति-पत्नी दोनों बने सरपंच! जनता का भरोसा, एक परिवार से दो नेता, गांवों में जश्न। अब मायका-ससुराल दोनों के विकास की बड़ी जिम्मेदारी।
राजनीति में नई मिसाल: पति-पत्नी दोनों बने सरपंच! जनता का भरोसा, एक परिवार से दो नेता, गांवों में जश्न। अब मायका-ससुराल दोनों के विकास की बड़ी जिम्मेदारी।
छत्तीसगढ़ में पंचायत चुनाव के दौरान एक ऐतिहासिक और अनोखी घटना घटी, जब एक ही परिवार के दो सदस्य—पति-पत्नी ने अलग-अलग गांवों से सरपंच पद पर जीत हासिल की। मुंडा गांव से हलमन सिंह ध्रुवा और दाबरीगुड़ा से उनकी पत्नी ललिता ध्रुवा ने शानदार जीत दर्ज कर नया इतिहास रच दिया मैनपुर विकासखंड के मुड़ागांव पंचायत से भाजपा के कद्दावर नेता हलमन ध्रुवा ने अपने प्रतिद्वंदी को 277 वोटों से हरा कर तीसरी बार सरपंच बने हैं तो वहीं उनके पत्नी ललिता ध्रुवा ने अपने प्रतिद्वंदी को 119 मतों से हरा कर ग्राम पंचायत दाबरीगुड़ा में पहली बार सरपंच चुनाव जीत गई है।
यह पहली बार है जब राज्य में किसी दंपति को एक साथ सरपंच बनने का गौरव प्राप्त हुआ है। इस अनोखी जीत के बाद दोनों गांवों में खुशी और उत्साह का माहौल है। जहां ललिता ध्रुवा अपने मायके गांव की सेवा करेंगी, वहीं हलमन सिंह ध्रुवा अपने पैतृक गांव का नेतृत्व करेंगे।
-हलमन सिंह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता माने जाते हैं, जबकि ललिता ध्रुवा भी भाजपा में एक महत्वपूर्ण पद पर कार्यरत हैं। इससे पहले भी दोनों ने चुनाव लड़ा था, लेकिन सफलता नहीं मिली थी। इस बार जनता ने उन पर भरोसा जताया और दोनों को अपने गांवों की जिम्मेदारी सौंपी।
अब इनके सामने सबसे बड़ी चुनौती गांवों के विकास को गति देना है। दिलचस्प बात यह भी है कि हलमन सिंह को अपने गांव के साथ-साथ अपनी पत्नी के मायके—यानी अपने ससुराल के विकास की भी जिम्मेदारी निभानी होगी।

